स्कूटी वाली बहनजी… मोटरसाइकिल वाले बाबू! 25 सालों से संगम नोज पर गूंजती एक आवाज
प्रयागराज के संगम नोज पर अगर आप कभी गए होंगे, तो एक आवाज़ ज़रूर सुनी होगी— “मोटरसाइकिल वाले बाबू, स्कूटी वाली बहनजी, कृपया घाट के किनारे वाहन न ले जाएं…”
यह कोई रिकॉर्डेड अनाउंसमेंट नहीं है। यह आवाज़ है हरिश्चंद्र की, जो पिछले 25 वर्षों से संगम नोज पर श्रद्धालुओं को दिशा और व्यवस्था का संदेश दे रहे हैं।
संगम नोज की पहचान बन चुकी आवाज़
माघ मेला, अर्धकुंभ और महाकुंभ जैसे विशाल आयोजनों में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच हरिश्चंद्र की मधुर आवाज़ व्यवस्था बनाए रखने का काम करती है।
कौन हैं हरिश्चंद्र?
हरिश्चंद्र प्रयागराज के उरुवा ब्लॉक स्थित टिकरी गांव के निवासी हैं। वह होमगार्ड विभाग से जुड़े हैं और पुलिस के सहयोगी के रूप में संगम नोज पर वर्षों से तैनात हैं।
साल 2001 में पहली बार उनकी ड्यूटी संगम नोज पर लगी थी। तब से लेकर आज तक वह हर बड़े धार्मिक आयोजन में यहीं नजर आते हैं।
आवाज़ कैसे बनी पहचान
हरिश्चंद्र पहले रामायणी टीम में कार्य करते थे। उनकी स्पष्ट और मधुर आवाज़ सुनकर अधिकारियों ने उन्हें अनाउंसमेंट की जिम्मेदारी सौंपी।
श्रद्धालु ही हैं परिवार
हरिश्चंद्र कहते हैं कि संगम पर आने वाला हर श्रद्धालु उनका परिवार है। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है।
रिटायरमेंट के बाद भी सेवा
अगले दो वर्षों में हरिश्चंद्र रिटायर होने वाले हैं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिया है कि रिटायरमेंट के बाद भी सेवा भाव से संगम नोज पर उनकी आवाज़ गूंजती रहेगी।
आज के डिजिटल दौर में भी हरिश्चंद्र यह साबित करते हैं कि इंसानी आवाज़, संवेदना और सेवा भाव का कोई तकनीकी विकल्प नहीं हो सकता।

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